Indus Valley Civilization (सिंधु घाटी सभ्यता) in Hindi

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सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization)

Indus Valley Civilization
Indus Valley Civilization

Indus Valley Civilization: सिंधु सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, आरम्भिक नगर (हड़प्पा सभ्यता व इसके नगर) भारत का हज़ारों साल पहले का इतिहास कुछ ऐसे सबुत जिनसे हमे इस सभ्यता का पता लगता है | यह उस समय की बात है जब कागज़ भी नहीं बना था , उस समय सूखे पत्तो पर व कांसे की प्लेट पर लिखा जाता था | खुदाई में मिले चट्टानों ,पत्थरो ,खम्बो व दीवारों हथियारों व ओजारो से उस समय की संस्कृति ,जीवनयापन व लोगो क बारे म पता लगता है | हाल ही में हुई महत्वपूर्ण खोजो से हमे इस इतिहास के बारे म पता लगता है| पुरातत्वविदों (archaeologists) ने इस खोज में महत्वपूर्ण योगदान किया| हड़प्पा व मोहनजोदड़ो व इसके नगर की खीज में साल 1920 में की गई खोज का श्रय पुरातत्वविद (archaeologist ) दयाराम साहनी (Mortimer wheeler), राखल दस बनर्जीl, (John Marshall) Alexander Cunninghum व अन्य| इस खोज और खुदाई में मिले नगरों से इस सभ्यता की संस्कृति का पता लगता है कि यह सभ्यता कितनी विकसित और सफल थी | यह सभ्यता 3500 ईसा पूर्व सिन्धु नदी के किनारे बसी थी | इस सभ्यता को कांस्य सभ्यता भी कहा जाता है क्योंकि कांस्य पहली बार कांस्य यही से मिले | मैदानीय इलाको मे व्यापक रूप से फैली सरस्वती नदी क किनारे बसा था हड़प्पा नगर| जो की अब सूख़ चुकीं है| इसलिये इस सभ्यता को सिन्धु सरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है|

हड़प्पा सभ्यता का इतिहास (Harappa Civilization)

Harappa Civilization
Harappa Civilization

Harappa Civilization: हड़प्पा सभ्यता भारतीय इलाको या भागो के साथ और भी कई भागो तक फैली हुई थी| वे इलाके या नगर है सिंध,ब्लूचिस्तान का तुगान्दा, पंजाब, हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश , उत्तरी राजस्थान ,गुजरात , उत्तरी , महाराष्ट्र हड़प्पा के महत्वपूर्ण नगर सिधु नदी के बाएं स्थित मोहनजोदड़ो, हड़प्पा उत्तरी राजस्थान मे कालीबंगा ब्लूचिस्तान मे मेहरगढ़ गुजरात मे धोलावीरा व लोथल आओ अब हम हड़प्पा सभ्यता क नगरो के भवन निर्माण , सड़को,नालियो आदि के बारे मे जानकारी लेते है | हड़प्पा सभ्यता के समय बने नगर व भवन उस समय के दृष्टान्त योग्य निर्माण कौशल को दर्शाते हैं| ये नगर दो भागो मे विभाजित थे | उपरी हिस्सा या भाग को नगर दुर्ग (citadel) कहते थे | नगर दुर्ग का निर्माण इस तरह से था की युद्ध के समय सुरक्षित रहे और ये आम नागरिक के घरो को मिलाकर चारो और मजबूत दीवारे खड़ी करके किया जाता था | इस नगर मे हरित मार्ग महत्वपूर्ण भाग , धार्मिक भवन ,महत्वपूर्ण दुकाने आदि थे | निचले नगर मे रहने वाले लोगो मे शिल्पकार , किसान , पशुपालक आदि रहते थे | निचले नगर मे रहने वाले लोगो को बाढ़ , युद्ध के समय हमले का डर रहता था | हड़प्पा , मोहनजोदड़ो व लोथल के नगरो में बड़े – बड़े भंडार गृह मिले हे | इन भंडार गृहों में अनाज व अन्य तरह का सामान रखा जाता था | हड़प्पा नगर में मिले सबसे ख़ास व विशेष आकृति के बड़े स्नानघर | ये बड़े स्नानघर उस समय के इंजीनियरिंग कौशल को दर्शाते है इस स्नानघर का माप 12 मीटर X 7 मीटर था और गहराई 3 मीटर थी | इस स्नानघर मे अन्दर जाने व बाहर आने क लिय दोनों तरफ सीडिया थी | ये स्नानघर बड़े शासको व उनके खास मेहमानों के लिए होता था| ये स्नानघर उन शासको के कमरों क बीचो बिच हुआ करता था जिसके चारो और बड़ी लम्बी दीवारे होती थी | इन स्नानघरो में गरम पानी डालने व निकालने का भी अलग से इंतजाम था | इनमे पानी एक बड़े कुए द्वारा डाला जताता जो इनसे लगा हुआ या जुडा रहता था | इनसे जुडी हुई अलग से नालिया भी थी जिससे पानी निकलता था |

सिन्धु घाटी सभ्यता में नगर-योजना

सिन्धु घाटी सभ्यता में नगर-योजना
सिन्धु घाटी सभ्यता में नगर-योजना (Town Planning of Indus Valley Civilization)

Town Planning of Indus Valley Civilization: हड़प्पा सभ्यता के निचले नगरो के घर व गलिया इन नगरो की गलिया सुव्यवस्थित व सीधी हुआ करती थी मुख्य गली 10 मीटर चोडी होती थी | मुख्य गली क दोनों तरफ घर हुआ करते थे \ ये घर मुख्यतः एक या दो मंजिल होते थे | ये घर पकी लाल ईटो के बने होते थे जिनकी मजबूत दीवारे होती थी| छत समतल होती थी व उनमे खिड़की दरवाज़े लकड़ी के बने होते थे | इन घरो के स्नानघर, घर एक तरफ क हिस्से में होते थे जिनकी नालिया गली की नालियो से जजुडी हुई थी | गली की नालिया गली के side यानि एक किनारे पे होते थी और वह ईटो या पत्रों से ढकी रहती थी ताकि गली म साफ सफाई रहे | कुछ घरो में उनके खुद के कुएं हुआ करते थे | य घर अमीर व्यापारियो व उच्च वर्गीय लोगों के थे | अन्य लोग जो की मजदुर वर्ग था वे एक कमरे रूपी मकान में रहते थे | यहाँ मिले कुछ और अवशेषों से पता लगता है की यहाँ के लोग कुत्ते,भेड़, बकरी, गाय व बैल जेसे जानवरों को पलते थे | उस समय क कपड़ो के कपड़ो के बारे में वह मिले कुछ खास अवशेषों से पता लगता है जैसेः कपडे बनाने वाला उपकरण सूती यानि कपास जैसे कपड़ो को बुना या बनाया जाता था इन उपकरणों से | ऐसा माना जाता है की ये काम घर में रहने वली महिलायें करती होंगी | बड़े व लम्बे कपड़ो को शारीर से लपेटा जाता था | महिलायें व पुरुष दोनों ही गले में माला व हाथो में कड़ा पहना करते थे | ये गहने शंख ,मोती , कीमती पत्थर ,व सोने – चाँदी के होते थे | इस सभ्यता मे तुलना व मापन प्रणाली विकसित थी | ये बाट अलग-अलग आकृतियो में मिले है | ये आयताकार व गोल अलग- अलग आकृतियो में मिले है जो की आकर्षक पत्थरो क बने होते थे | खोज मे मिले छोटे खिलोने जो की बालको के लिय होते थे |एक खिलौना जिसमे की एक बैलगाड़ी रोई खिओना मिला है |जिससे पता लगता है की वो पहिया भी प्रयोग करते थे सामान लेन ले जाने क ललिय | सूचनाओं के आधार पर हड़प्पा से मिले मुहर पकी मिटटी यानि टेराकोटा ,धातुओ के बने होते थे | विभिन्न आकृतियो से पता लगता है की वे लोग देविओ की पूजा करे थे | अन्य मिले अवशेषों पर आकृतियो से पता लगता है की वे हिन्दू देवता पशुपति व शिव की पूजा करते थे | वे लोग पवित्र पेड़ , जानवर आदि की पूजा करते थे अवशेषों पर बने चित्रों से ये पता लगता है | कुछ मुहरो पर योग करते हुए चित्र भी मिले है | इससे यह ज्ञात होया है की उस समय योग भी किया जाता था | हड़प्पा सभ्य्त क लोग आचे शिल्पकार व मूर्तिकार भी थे| कुछ विशेष मुर्तियो क मिलने पर ये पता लगता है ] हड़प्पा सभ्यता की कला का सबसे प्रमुख उदाहरण नृत्य करती हुई एक महिला का जो की कांस्य की मूर्ति है और वे मूर्ति मोहनजोदड़ो में मिली है | छोटे मिटटी क खिलोने ,फूलदान , मटके, बर्तन आदि से यह पता लगता है की उनका इस कला में कौशल कितना अधिक था |

हड़प्पा के लोग मिटटी के बर्तन बनाने म बड़े ही कुशल व विकसित थे |वे इन पर अलग अलग तरह के डिजाईन व चित्र बनाते थे साप, फुल व जानवर आदि क चित्र बनाते थे |ये बर्तन लाल मिटटी के बने जाते थे और इन पर काले रंग से चित्र बनते थे | मिटटी के बटन ,मुहर कांस्य के बने हथियार और विभिन प्रकार के मिटटी के बर्तन हड़प्पा सभ्यता से मिलते है | हड़प्पा सभ्यता हजारो साल पूरानी है | ये दुनिया की सबसे पहले नगरों म से एक सभ्यता है जिसका अंत होना शुरू हुआ | प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ ,सूखा कोई भयंकर फैलने वाली बीमारी या जंगली जानवरों का हमला इस सभ्यता का अंत माना जाता है |


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