Jahangir - TS HISTORICAL

Jahangir | Jahangir History in hindi

Jahangir Kon tha : जहांगीर मुग़ल सल्तनत के तीसरे सुल्तान यानी जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के बेटे थे। जहांगीर की पैदाइश 1569 में फतेहपुर सीकरी में हुई थी। क्योंकि अकबर को शेख सलीम चिश्ती से बहुत ज्यादा अकीदत थी इस वजह से अकबर ने अपने बेटे का नाम भी नूर उद्दीन मोहम्मद सलीम रखा था जहांगीर जलालुद्दीन अकबर की उसी राजपूत बीवी के पेट से पैदा हुआ था जो इतिहास में जोधा बाई के नाम से जानी जाती हैं।

अकबर ने जहांगीर की बहुत अच्छी तरह से परवरिश कराई थी जहांगीर एक अच्छा शायर होने के साथ-साथ कई सब्जेक्ट में भी महारत रखा करता था लेकिन जहांगीर की सबसे बड़ी कमजोरी शराब थी। क्योकि सलीम शराब का बहुत ज्यादा शौकीन था कहा जाता है कि अकबर ने मरने से पहले ही अपने दरबारियों के सामने एलान कर दिया था कि मेरे मरने के बाद मेरी सल्तनत का अगला सुल्तान सलीम ही होगा

इसी वजह से 1605 में जैसे ही अकबर की मौत हुई उसके फौरन बाद 1605 में ही सलीम मुग़ल सल्तनत के तख्त पर बैठ गया था सलीम ने जैसे ही मुग़ल सल्तनत की ताकत को संभाला उसने अपना नाम जहांगीर रख लिया और इसी नाम से वो हिस्ट्री में हमेशा हमेशा के लिए मशहूर हो गया।

जहांगीर ने हिंदुस्तान पर 22 साल हुकूमत की और कहा जाता है यह 22 साल हिंदुस्तान में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी खुशी और चैन के साथ गुजरे थे लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन 22 सालों में जहांगीर ने शुरू के कुछ सालों में ही हुकूमत की। वरना बचे हुए बाकी तमाम सालों में जहांगीर नाम के लिए बादशाह था पूरी सल्तनत को उसकी एक बीवी जिसका नाम नूरजहां था वह संभाला करती थी।

Nur Jahan and Jahangir Marriage

नूरजहां सलीम से शादी करने से पहले एक विधवा औरत थी जिससे जहांगीर ने 1611 में शादी की थी कहा जाता है कि जहांगीर को इससे हद से ज्यादा मोहब्बत हो गई थी जिसकी वजह से जहांगीर नूरजहां के हर फैसले को मानने के लिए हमेशा तैयार रहता था लेकिन दोस्तों अब सवाल यह है कि हिंदुस्तान के सबसे बड़े सुल्तान यानी जहांगीर ने एक विधवा औरत से शादी क्यों की और आखिर नूरजहां में ऐसी क्या खास बात थी कि जहांगीर उसे हद से ज्यादा मोहब्बत किया करता था

जहांगीर और नूरजहां की शादी को लेकर सभी इतिहासकार दो अलग-अलग तरह की कहानियां सुनाते है कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जिस वक्त मुग़ल सल्तनत जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर बैठे हुए थे उस वक्त नूर जहां अपनी पूरी फैमिली के साथ अकबर के महल में ही रहा करती थी लेकिन अचानक से 13 साल की नूरजहां का सामना अकबर के बेटे सलीम से हुआ और उसे देखते ही नूरजहां से इश्क़ हो गया था।

लेकिन जब अकबर को इस बात की खबर लगी कि मेरे बेटे जहांगीर को नूर जहां से इश्क हो गया है तो अकबर को यह डर सताने लगा था कि कहीं ऐसा तो नहीं कि नूरजहां अपनी बेटी का सहारा लेकर मेरी सल्तनत के खिलाफ बगावत करने के मूड में है क्योंकि हो सकता है कि वह नूरजहां की शादी जहांगीर से करा कर मुग़ल सल्तनत पर कब्जा करना चाहता हो। इसलिए अकबर ने नूरजहां के वालिद के ऊपर जोर डालकर नूरजहां की शादी अपने एक ईरानी कमांडर जिसका नाम शेरफगन था

उससे करा दी थी उनकी शादी कराने के बाद अकबर ने नूरजहां और शेरफगन दोनों को अपनी बंगाल की रियासत देकर बंगाल की तरफ रवाना कर दिया शेरफगन अपनी बीवी नूरजहां के साथ वहां पर सुकून से रहने लगा। शेरफगन और नूरजहां की एक बेटी भी पैदा हुई जिसका नाम लाड़ली बेगम रखा गया था भले ही बंगाल में नूर जहां अपनी एक चैन की जिंदगी गुजार रही थी लेकिन दूसरी तरफ जहांगीर अभी तक नूरजहां को नहीं भूल पाया था।

इसी वजह से नूरजहां की शादी के ठीक 11 साल बाद जब अकबर की मौत के बाद मुग़ल सल्तनत का अगला सुल्तान जहांगीर बना तो उसने सबसे पहले अपनी मोहब्बत को दोबारा हासिल करने का इरादा किया है कहा जाता है कि जहांगीर ने अपने एक सौतेले भाई जिसका नाम कुतुबुद्दीन था उसे बंगाल की तरफ रवाना किया किया कुतुबुद्दीन ने बंगाल जाकर शेरफगन से यह कहा कि तुम बादशाह की इज्जत और मोहब्बत के लिए अपनी बीवी को तलाक दे दो क्योंकि बादशाह जहांगीर उससे शादी करना चाहता है जहांगीर के भाई कुतुबुद्दीन की यह बात सुनकर शेरफगन ग़ुस्से से लाल हो गया

उसने गुस्से में तलवार निकाली और कुतुबुद्दीन को कत्ल कर दिया लेकिन जवाबी कारवाही मे कुतुबुद्दीन के सिपाहियों ने भी शेरफगन को क़त्ल कर दिया था और उसके बाद नूरजहां को कैदी बनाकर आगरा के शाही महल में लाया गया था कहा जाता है कि नूरजहां ने केदी बनने के बाद शुरू दे एक-दो साल तक तो जहांगीर से शादी करने पर रजामंदी नहीं दिखाई लेकिन धीरे-धीरे जब उसका गम कम होता चला गया तो वो जहांगीर से शादी करने पर राजी हो गई और उसके बाद धीरे-धीरे वह जहांगीर की सबसे प्यारी बीवी बन गई थी।

लेकिन दोस्तों कुछ इतिहासकार इस कहानी को गलत बताते हैं वह कहते हैं कि सच्चाई इसके बिलकुल उलट है जहांगीर और नूरजहां की शादी से पहले कभी मुलाकात हुई नहीं थी बल्कि जहांगीर और नूरजहां की शादी की जो कहानी है वह है जहांगीर के बेटों में से एक बेटे खुसरो ने उसके खिलाफ बगावत कर दी थी लेकिन जहांगीर अपने बेटे को रोकने में कामयाब हो गया था बगावत कुचलने के बाद जहांगीर ने उन तमाम लोगों को कत्ल करवाना शुरू कर दिया था जो भी बगावत में उसके बेटे खुसरो के साथ थे लिहाजा जहांगीर के बेटे खुसरो का साथ देने वाले लोगों में नूरजहां का एक भाई भी था

जिसकी वजह से उसके भाई और बाप को भी गिरफ्तार कर लिया गया था और नूरजहां को भी कैदी बनाकर आगरा की शाही महल में लाई गई थी जहांगीर जब अपने कैदियों से मिल रहा था तो उसकी नजर अचानक से नूरजहां पर पड़ गई थी और पहली नजर में ही नूरजहां जहांगीर को इतनी पसंद आई कि वह उस से इश्क कर बैठे और बाद में उसने उससे शादी कर ली थी तो भले ही जहांगीर और नूरजहां की शादी की इन दोनों कहानियो में से कोई भी कहानी सच हो लेकिन दोनों कहानियों से यह बात तो साबित हो जाती है कि नूरजहां जहांगीर की हद से ज्यादा प्यारी बीवी थी।

जहांगीर अपनी बीवी नूरजहां के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार करता था यही वजह थी कि जहांगीर ने नूरजहां से शादी करने के बाद सल्तनत का तमाम सिस्टम नूरजहां के हवाले कर दिया था बल्कि जहांगीर खुद ही कहा करता था कि मैंने अपनी पूरी सल्तनत तो अपनी प्यारी बीवी नूरजहां के हवाले कर दी है। जहांगीर को शिकार करने का बहुत शौक था। वो हाथी और शेरों का शिकार किया करता था शिकार पर जाते वक्त ज्यादातर अपनी बीवी नूरजहां को भी साथ लेकर जाया करता था एक बार की बात है कि जहांगीर हाथी पर बैठकर शेरों का शिकार कर रहा था उस हाथी पर उसकी बीवी नूर जहां भी सवार थी

लेकिन गफलत में अचानक से एक टाइगर ने उछलकर हाथी पर सवार जहांगीर पर हमला किया लेकिन शेर जहांगीर को कबजे मे ले पाता उससे पहले ही पास ही में बैठी नूरजहां ने बंदूक से शेर के ऊपर हमला कर दिया गोली लगते ही शेर वहीं मर गया जिसकी वजह से जहांगीर की जान बच गई थी जहांगीर ने अपनी जान बचाने की वजह से नूरजहां को बहुत ज्यादा शुक्रिया अदा किया था नूरजहां सल्तनत को कितना ज्यादा अपने कंट्रोल मे कर लिया था

इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है नूरजहां ने खुद अपने नाम के पूरी सल्तनत में सिक्के चलवा दिए थे हालांकि किसी भी सल्तनत में सिक्के उसी के नाम के चलते हैं कि जो सल्तनत का सुल्तान होता है। मुग़ल सल्तनत का जो भी हुकुम जारी हुआ करता था उसको मनाने पर मुगल सल्तनत के सुल्तान के सिग्नेचर की जगह पर नूरजहां के दस्तखत हुआ करते थे नूरजहां की इजाजत के बगैर मुग़ल सल्तनत में कोई भी छोटा या बड़ा कदम नहीं उठाया जा सकता था।

जहांगीर की बीवी नूरजहां होशियार होने के साथ-साथ बहुत बहादुर भी थी और उसकी बहादुरी का सबूत जहांगीर के आखिरी दिनों की इस कहानी को पढ़कर मिलता है कहा जाता है कि जहांगीर के आखिरी दिनों में उसके एक जनरल जिसका नाम महबत खान था। उसने उसके खिलाफ बगावत कर दी थी बगावत करने के साथ-साथ महबत खान ने जहांगीर को बंधी बना लिया था लेकिन जहांगीर की प्यारी नूरजहां ने अपनी बहादुरी के बलबूते पर न सिर्फ महबत खान को शिकश्त दी। बल्कि जहांगीर को उसने जिंदा भी बचा लिया था लेकिन इस हादसे के कुछ दिनों के बाद ही जहांगीर का इंतकाल हो गया था।

नूरजहां ने जहांगीर की मोहब्बत 1697 ई० में लाहौर में जहांगीर का एक आलीशान मकबरा तैयार करवाया था जहांगीर के इस मकबरे को मुगलों की टॉप इमारतों में से एक इमारत माना जाता है। यह रावी नदी के किनारे लाहौर, पंजाब, पाकिस्तान में शाहदरा बाग में स्थित है।

4 thoughts on “Jahangir | Jahangir History in hindi”

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